देहरादून में आर्यिका रत्न 105 पूर्णमति माताजी का संघ मंगल चातुर्मास श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह के साथ चल रहा है।
चातुर्मास के तहत प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान, पूजन-अर्चना और आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। समवशरण विधान में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होकर धर्माराधना और पुण्य अर्जन कर रहे हैं।
समवशरण का धार्मिक महत्व
आर्यिका पूर्णमति माताजी ने बताया कि जैन धर्म में समवशरण तीर्थंकर भगवान की दिव्य धर्मसभा मानी जाती है। इसमें केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद भगवान की दिव्यध्वनि के माध्यम से जीवों के कल्याण के लिए धर्मोपदेश दिया जाता है।
समवशरण के चारों द्वारों के बाहर भव्य मानस्तंभ होते हैं। इसके दर्शन से व्यक्ति में अहंकार और मान का त्याग करने की प्रेरणा जागृत होती है।
देश-विदेश से पहुंच रहे श्रद्धालु
मीडिया संयोजक मधु जैन के अनुसार, आर्यिका पूर्णमति माताजी के मंगल चातुर्मास और समवशरण विधान में शामिल होने के लिए देहरादून के साथ देश के विभिन्न शहरों और विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।
चातुर्मास के आयोजनों से देहरादून का वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।