सेंटिएंट ने दूध और अंडों के उत्पादन केंद्रों की अलग-अलग जांच की। रिपोर्ट में पशुओं को रखने, उनके साथ व्यवहार, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन से जुड़ी कई समस्याओं का उल्लेख किया गया है।
दूध उत्पादन से जुड़ी जांच में चंडीगढ़, पंजाब, उत्तराखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की 100 से अधिक इकाइयों को देखा गया। कई जगह पशुओं को कम जगह में रखा जा रहा था और लंबे समय तक रस्सियों से बांधकर रखने की बात सामने आई। कुछ पशुओं के घावों का इलाज नहीं किया जा रहा था तथा बछड़ों के लिए पर्याप्त छत या सुरक्षित जगह नहीं थी।
कई जगह खुले नालों, गंदे पानी और जमा कचरे के पास दूध निकाला जा रहा था तथा दूध को खुले बर्तनों में रखा जा रहा था।
दूसरी जांच में हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु में अंडे देने वाली मुर्गियों के 21 केंद्रों को देखा गया। कई जगह मुर्गियों को छोटे-छोटे पिंजरों में बहुत अधिक संख्या में रखा गया। कुछ मुर्गियों के शरीर पर चोटें थीं और चोंच काटने की प्रक्रिया भी नियमित रूप से किए जाने की बात सामने आई।
रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि बाजार में बिकने वाला दूध या अंडा दूषित है या सभी उत्पादक इसी तरह काम करते हैं। हालांकि, जांच ने यह सवाल जरूर उठाया है कि बाजार तक पहुंचने से पहले पशुओं को किन परिस्थितियों में रखा जाता है और उनके साथ कैसा व्यवहार किया जाता है।
सेंटिएंट ने नियमित जांच, पहले से बने नियमों को सही तरीके से लागू करने और दूध-अंडा उत्पादन से जुड़े कामों में जवाबदेही बढ़ाने की मांग की है।