अक्टूबर में तापमान के उतार-चढ़ाव से बढ़ा बीमारियों का खतरा, बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की सलाह – Waqt Ki Nazar

अक्टूबर में तापमान के उतार-चढ़ाव से बढ़ा बीमारियों का खतरा, बच्चों और बुजुर्गों पर विशेष ध्यान देने की सलाह

देहरादून। होम्योपैथी के डॉ विनोद शर्मा का कहना है कि सुबह-शाम की ठंडक और दिन के तापमान में उतार-चढ़ाव के बीच सावधानी जरूरी, बच्चों और बुजुर्गों की सेहत का  विशेष ध्यान रखें।
 और मौसम में बदलाव के साथ शरीर को नए तापमान के अनुकूल ढलने में समय लग सकता है। अक्टूबर के इस दौर में सुबह-शाम की ठंडक और दिन में अपेक्षाकृत गर्मी के बीच सर्दी, खांसी, गले में खराश, नाक बहने और बुखार जैसी परेशानियों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। बदलते मौसम के साथ वातावरण में मौजूद धूल, परागकण और अन्य एलर्जी पैदा करने वाले तत्व भी कुछ लोगों की परेशानी बढ़ा सकते हैं। वहीं, वायरल संक्रमण से बचने के लिए साफ-सफाई और सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
वहीं डॉ राजीव दीक्षित के अनुसार, मौसम में बदलाव अपने आप किसी वायरल संक्रमण का कारण नहीं होता, लेकिन इस दौरान एलर्जी के लक्षण उभर सकते हैं और संक्रमण होने पर परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए शुरुआती लक्षणों पर ध्यान देना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
सर्दी, खांसी और बुखार को हल्के में न लें
मौसमी बदलाव के दौरान कई लोगों को गले में खराश, छींक, नाक बंद होने, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि, ये लक्षण एलर्जी या अलग-अलग संक्रमणों के कारण भी हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी का सही अनुमान लगाना मुश्किल है।
यदि बुखार लगातार बना रहे, खांसी बढ़ती जाए या शरीर में अत्यधिक कमजोरी महसूस हो तो चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, भ्रम की स्थिति या गंभीर कमजोरी होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लें। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए।
खानपान और दिनचर्या में रखें सावधानी
बदलते मौसम में स्वस्थ रहने के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या महत्वपूर्ण है। मौसमी फल, हरी सब्जियां और पौष्टिक भोजन को आहार में शामिल करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें।
सुबह और रात के समय तापमान कम होने पर मौसम के अनुरूप कपड़े पहनें। पसीने से भीगे कपड़ों में अधिक देर तक न रहें। धूल और धुएं से बचने का प्रयास करें। एलर्जी से परेशान लोगों को उन चीजों से दूरी बनानी चाहिए, जिनसे उनके लक्षण बढ़ते हैं।
संक्रमण से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय
मौसमी संक्रमण से बचाव के लिए कुछ सामान्य सावधानियां काफी मददगार हो सकती हैं।
– साबुन और पानी से नियमित रूप से हाथ धोएं।
– खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल या टिश्यू से ढकें।
– बीमार व्यक्ति के निकट संपर्क से बचें और खुद बीमार होने पर दूसरों में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए सावधानी बरतें।
– घर और आसपास साफ-सफाई रखें तथा कमरों में उचित वेंटिलेशन बनाए रखें।
– बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन न करें।
– बुखार या संक्रमण के लक्षण होने पर जरूरत के अनुसार जांच और उपचार के लिए चिकित्सक से संपर्क करें।
बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर दें विशेष ध्यान
बदलते मौसम में बच्चों और बुजुर्गों की सेहत को लेकर परिवार के सदस्यों को अधिक सजग रहने की जरूरत है। बच्चों में तेज बुखार, सुस्ती, पानी कम पीना या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें। बुजुर्गों में भी असामान्य कमजोरी, लगातार बुखार या सांस संबंधी समस्या को अनदेखा नहीं करना चाहिए।
इसके अलावा, बारिश के बाद कहीं पानी जमा हो तो उसे हटाना जरूरी है, क्योंकि रुका हुआ पानी मच्छरों के प्रजनन का कारण बन सकता है। मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय चिकित्सक से सलाह लें।
जागरूकता ही बेहतर बचाव
मौसम में बदलाव सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है, लेकिन लापरवाही के कारण छोटी स्वास्थ्य समस्या गंभीर रूप ले सकती है। संतुलित खानपान, पर्याप्त आराम, स्वच्छता और समय पर चिकित्सा सलाह से कई परेशानियों से बचाव किया जा सकता है। लोगों को चाहिए कि वे अफवाहों से बचें, बिना पुष्टि किसी बीमारी के फैलने की खबर पर भरोसा न करें और स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर योग्य चिकित्सक की सलाह को प्राथमिकता दें।

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