डॉ. ईशा रानी ने उत्तराखंड की हिंदी पत्रकारिता की भाषा पर की पीएचडी

देहरादून। उत्तराखंड की हिंदी पत्रकारिता और समाचार पत्रों की भाषा पर केंद्रित शोध कार्य के लिए डॉ. ईशा रानी को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने महाराज विनायक ग्लोबल यूनिवर्सिटी, जयपुर से हिंदी विषय में अपना शोध कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया। उनका शोध उत्तराखंड से प्रकाशित विभिन्न समाचार पत्रों की भाषा के विश्लेषण पर आधारित रहा।

डॉ. ईशा रानी ने विभिन्न हिंदी समाचार पत्रों की भाषा का विश्लेषणात्मक अध्ययन के विशेष संदर्भ विषय पर अपना शोध कार्य किया। यह शोध कार्य डॉ. संजू झा के निर्देशन में पूरा हुआ।

शोध के दौरान उत्तराखंड से प्रकाशित प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों की भाषा का विस्तृत अध्ययन किया गया। इसमें समाचार पत्रों में प्रयुक्त शब्दावली, भाषा-शैली, वाक्य-विन्यास, समाचार प्रस्तुति तथा भाषायी प्रयोग जैसे विभिन्न पक्षों का विश्लेषण किया गया। साथ ही सामाजिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय परिवेश में हो रहे बदलावों का समाचार भाषा पर पड़ने वाले प्रभाव को भी अध्ययन का हिस्सा बनाया गया। शोध के मूल्यांकन के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के भाषा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि प्रकाश टेकचंदानी ने बतौर परीक्षक शोध कार्य का आकलन किया। शोध कार्य के मूल्यांकन और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद डॉ. ईशा रानी को डॉक्टरेट की उपाधि प्रदान की गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. राज कमल मिश्रा ने डॉ. ईशा रानी को डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने पर शुभकामनाएं दीं और उनके शोध कार्य की सराहना की। उन्होंने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि शोध के माध्यम से हिंदी भाषा और पत्रकारिता के क्षेत्र में किए गए ऐसे अध्ययन अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं।

डॉ. ईशा रानी ने कहा कि समाचार पत्र केवल सूचनाओं के प्रसार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे भाषा के विकास और समाज में भाषायी समझ को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नियमित रूप से समाचार पत्र पढ़ने से भाषा की समझ, शब्द-भंडार और विभिन्न विषयों पर दृष्टिकोण विकसित होता है।

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