देहरादून, डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ तथा अनुप्रयुक्त जीवविज्ञान एवं पारिस्थितिकी अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में विश्वविद्यालय के इंदिरा मिरी सभागार में एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. जितेन हजारिका एवं पद्मश्री प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में एम्स गुवाहाटी के अध्यक्ष एवं अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त ऑर्थोपीडिक सर्जन प्रो. डॉ. बी. के. एस. संजय उपस्थित रहे। उन्होंने “अनुशासन, नैतिकता और उत्कृष्टता रू एक शल्य चिकित्सक के जीवन से सीख” विषय पर प्रेरणादायी व्याख्यान प्रस्तुत किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अनुशासन और नैतिकता ही उत्कृष्टता की ओर ले जाते हैं तथा जीवन में स्थायी सफलता प्राप्त करने के लिए समर्पण, ईमानदारी और सामूहिक सहयोग अत्यंत आवश्यक हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति की सफलता व्यवहार, ज्ञान और कौशलकृइन तीनों पर निर्भर करती है। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि अच्छा व्यवहार, सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों के साथ अर्जित ज्ञान ही व्यक्ति को वास्तविक उत्कृष्टता तक पहुंचाता है। चिकित्सा क्षेत्र के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने विद्यार्थियों एवं उपस्थित श्रोताओं को प्रेरित किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अनुप्रयुक्त जीवविज्ञान एवं पारिस्थितिकी अध्ययन केंद्र की निदेशक डॉ. पल्लवी डेका बुजरबरुआ ने की तथा स्वागत भाषण भी प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. अंगशुर भट्टाचार्य ने किया। डॉ. जादब बोरा, सेंटर फॉर स्टडीज इन परफॉर्मिंग आर्ट्स के सहायक प्रोफेसर, ने कार्यक्रम के आयोजन में समन्वयक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. परमानंद सोनोवाल, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, शिक्षक-शिक्षिकाएं तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।