दिल्ली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशल इंटेलीजेंस विषय पर वैश्विक सम्मेलन जारी है, जिसमें विश्व के अनेक देशों से ए आई पर कार्य करने वाले संगठन भागीदारी कर रहे हैं। इतिहास गवाह है कि मानव ने जब – जब अपनी महत्वाकांक्षा को पूर्ण करने की ओर कदम बढ़ाया है, तब – तब विज्ञान का मानवीय जीवन में दखल बढ़ा है। यह दखल शुभ भी हो सकता है और अशुभ भी, हालांकि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। तकनीक के सही उपयोग के लिए आवश्यक है कि उपयोग करने वाला समाज मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ हो। वर्तमान समय में अनेक घटनाएं ऐसी घटित हो रही हैं जो जीवन को प्रभावित कर रही हैं, जैसे लोगों को डिजिटल अरेस्ट कर लाखों – करोड़ों रुपयों की ठगी। ए आई के माध्यम से बने अश्लील चित्रों द्वारा व्यक्ति / महिलाओं का चरित्र हनन। इसका ताजा उदाहरण है एक केंद्रीय मंत्री द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री पर लगाएं गए आरोप।
ए आई के माध्यम से फेक न्यूज बना कर फैलाना, वर्तमान समय में वॉट्सएप यूनिवर्सिटी पर तैरती सूचनाएं बड़ी संख्या में झूठी होना आदि – आदि चिंता का विषय बना हुआ है। आज हम मानवीय जीवन में ए आई के बढ़ते दखल के सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं पर अध्ययन करने का प्रयास करेंगे। साथ ही इसका निर्णय आप सब पर ही छोड़ेंगे कि भविष्य का समाज कैसा होगा?
ए आई 21 वीं सदी की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक है, जिसने शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासन, उद्योग और संचार सहित अनेक क्षेत्रों में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं। आज का मंथन ए आई के द्वैत स्वरूप का विश्लेषण प्रस्तुत करने का प्रयास करेगा। दरअसल
ए आई जहां एक ओर मानव जीवन को सरल, प्रभावी और उत्पादक बनाती है, तो दूसरी ओर इसके दुरुपयोग से सामाजिक, नैतिक और कानूनी संकट उत्पन्न हो सकते हैं। विशेष रूप से डीपफेक, फर्जी डिजिटल सामग्री, रोजगार संकट और गोपनीयता उल्लंघन जैसे मुद्दे भविष्य के लिए चुनौती बनकर उभर रहे हैं। इसको नकारा नहीं जा सकता। यह मंथन ए आई के लाभों और जोखिमों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए संतुलित नियमन, नैतिक मानकों और डिजिटल साक्षरता की आवश्यकता पर बल देने का प्रयास करेगा।
इसमें दो राय नहीं है कि मानव इतिहास में तकनीकी क्रांतियों ने सामाजिक संरचनाओं और जीवन शैली को गहराई तक प्रभावित किया है। हरित क्रांति, औद्योगिक क्रांति और सूचना क्रांति के बाद अब ए आई आधारित तकनीकी क्रांति विश्व व्यवस्था को पुनर्परिभाषित कर रही है। ए आई केवल स्वचालन (Automation) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विश्लेषण, निर्णय-निर्माण, रचनात्मक उत्पादन और व्यवहार पूर्वानुमान जैसे जटिल कार्यों को भी संभव बना रही है। तथापि, यह तकनीक सामाजिक विश्वास, नैतिकता और लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए नई चुनौतियाँ भी प्रस्तुत करती है। इस मंथन का उद्देश्य ए आई के लाभों एवं संभावित दुष्प्रभावों का अकादमिक दृष्टिकोण से विश्लेषण करना है तथा भविष्य के लिए नीतिगत सुझाव भी प्रस्तुत करना है।