एमेजॉन भारत में समुद्र तल से 4,500 फीट की ऊंचाई पर हिमालय तक ग्राहकों के ऑर्डर पहुँचा रहा

देहरादून,  ऊपरी हिमालय में समुद्र तल से 4500 फीट की ऊंचाई पर मौजूद गजौली में बना महर्षि आश्रम भारत में करीब 60 ध्यान अभ्यासियों के लिए एक शांत आश्रय की जगह है। यह एक ऐसा आश्रम है जहां दुनिया भर से लोग ध्यान का अभ्यास करने और आंतरिक शांति पाने के लिए आते हैं। बाहरी दुनिया द्वारा ध्यान न भटके इसलिए आश्रम को बाकी दुनिया से अलग और एकांत रखा गया है। हालांकि यह अभ्यासकर्ताओं के लिए एक बेहतरीन वातावरण है, लेकिन फिर भी यह स्थान रोजमर्रा की जरूरतों को इनसे काफी दूर कर देता है। किसी भी जरूरत के लिए नजदीकी शहर तक जाने के लिए पहाड़ी इलाके से पास के गांव गजौली तक 30 से 40 मिनट की पैदल यात्रा तय करनी पड़ती है। और अगर पास के शहर उत्तरकाशी जाना हो तो उसके लिए स्थानीय सार्वजनिक परिवहन का सहारा लेना पड़ता है। यह यात्रा न केवल मुश्किल है, बल्कि इसमें बहुत समय भी लग जाता है, क्योंकि आश्रम के आसपास कोई दुकान या डिलीवरी विकल्प नहीं है। लेकिन वर्ष 2020 में पूरा माहौल ही बदल गया जब एमेजॉन डॉट इन गजौली गांव में महर्षि आश्रम तक डिलीवरी करने वाली पहली और एकमात्र ई-कॉमर्स कंपनी बनी। इसने तो मानों सपनों को साकार ही कर दिया हो। अब यहां के लोग भारत के किसी भी कोने से चीजें ऑर्डर कर सकते हैं, और उन्हें उनके दरवाजे पर ही डिलीवरी मिल जाती है। एमेजॉन ने उत्तरकाशी और उसके आसपास के लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए मार्च 2019 में एक डिलीवरी सर्विस पार्टनर स्टेशन के साथ इस क्षेत्र में अपना काम शुरू किया। गजौली में महर्षि आश्रम की जरूरतों को समझते हुए, स्टेशन ने वर्ष 2020 की शुरुआत से आश्रम में भी डिलीवरी करना शुरू कर दिया। 4 साल से भी ज्यादा समय से महर्षि आश्रम में डिलीवरी करने वाली एकमात्र ई-कॉमर्स कंपनी होना भारत में एमेजॉन का अपने ग्राहकों के प्रति जुनून का एक अच्छा खासा सबूत है। डिलीवरी करने वालों के लिए, यह यात्रा सिर्फ एक सड़क का सफर तय करना नहीं है, बल्की उससे कहीं अधिक है। यह एक भरोसा है, जो ग्राहकों ने इन पर दिखाया है। इस यात्रा में 25 किलोमीटर की बाइक की सवारी के लिए एक ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्ता शामिल है। और इससे आगे 3 किलोमीटर से भी ज्यादा का सफर ऊँची-नीची चोटियों, पहाड़ियों और पठारों वाले भूभाग से होकर तय करना पड़ता है। इतना ही नहीं समतल क्षेत्रों के कम होने के कारण सर्दियों और मानसून के मौसम में सफर तय करना बहुत मुश्किल हो जाता है।

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