उत्तराखण्ड कौथिग में गीत संध्या का हुआ आयोजन – Waqt Ki Nazar

उत्तराखण्ड कौथिग में गीत संध्या का हुआ आयोजन

देहरादून,  अखिल गढ़वाल सभा के उत्तराखण्ड कौथिग में शनिवार को गीत संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में गढ़वाल सभा के अध्यक्ष रोशन धस्माना व महासचिव गजेंद्र भंडारी ने कहा कि सभा अपने सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिये कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी जैसे कलाकारों ने हमारी संगीत को जो ऊंचाई दी है, उसे युवा कलाकार बखूबी आगे बढ़ा रहे हैं।
मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने उद्बोधन में सभा की प्रशंसा करते हुए कहा कि सभा अपनी संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए बहुत बेहतरीन प्रयास कर रही है। सभा  पूरे उत्तराखण्ड की संस्कृति व कला को संजोने में अग्रणी भूमिका निभा रही है और उन्होंने सभा को हर सम्भव सहयोग देने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में कुमाऊं से आये गोपाल बाबू गोस्वामी के सुपुत्र रमेश बाबू ने जय मैय्या दुर्गे भवानी गा कर कार्यक्रम शुरू किया। इसके बाद संगीता ढोंडियाल ने मि घास कटलु, तू पूला बाँधिलो गाया। उसके बाद गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी जी ने कण प्यारा लगदा गौं धार, कण स्वानु दिखड़ू हिमाला
,के बाद, दार कु छट्यून छट्यून सी रैज्ञों मैं और घिंगतालो डांडा दयों थान के साथ प्ररीक्षा के साथ युगल गीत यख पहाड़ों मा जड्डू हवेगी भारी गा कर पंडाल को भावुक कर दिया। लोकगायक सनी दयाल ने अपने गीत ओ बेबीए  और बिडरु न मानिए से दर्शोकों को नाचने पर मजबूर कर दिया। संतोष खेतवाल जी के गीत तेरु बकी बात रूप कमायूँ च ने माहौल में और रंग भर दिया। इसजे बाद रमेश गोस्वामी ने तिलगा तेरी लम्बी लटी और और हाये तेरी रुमाला हं कर मानो रंगीले कुमाऊं का रंग घोल दिया हो। संगीता ढोंडियाल ने  ढोल दमाऊ बजी गेन दग्ढ़या की बारात मा और तैं दिल्ली गुजरात नि मेरी पहाड़ी बात की प्रस्तुति दी। इसके बाद नरेंद्र सिंह नेगी जी ने पुनः जनता को अपने गीतों से झूमा दिया , गीत थे,,  युगल गीत सुतरा की दौंली बल  और मैकु एक चुमखी बस भोत तेरा रूप की के बाद अपने सुपुत्र कविलास नेगी के साथ अपना प्रसिद्ध गीत मैं देहरा दून वाला हूँ गा कर माहौल सुंदर कर दिया। साथ साथ उन्होंने बहुत भुवक गीत त्वि छई त्वि त छई सबको भावुक कर दिया। इनके बाद सनी दयाल ने जौनसारी गीत कोदों का कोदूवा  और डांडे की चखुली गा का सबको नचा दिया। अंत मे संतोष खेतवाल ने मैं नि जान्यो नेपाल, रामरो लाग्यो ये गढ़वाल मा, गा कर कार्यक्रम का समापन किया। कार्यक्रम का संचालन अजय जोशी ने किया। अंत मे उपाध्यक्ष निर्मला बिष्ट ने सबको धन्यवाद दिया। इस अवसर पर रोशन धस्माना, गजेंद्र भंडारी, निर्मला बिष्ट, उदय शंकर भट्ट, अजय जोशी, संतोष गैरोला, वीरेंद्र असवाल के साथ अन्य संस्कृतिकर्मी भी उपस्थित थे।

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