हरेला पर्व पर मसूरी की पहाड़ियों पर लगाए जाएंगे फूल प्रजाति के पौधे

मसूरी, पर्यटन नगरी मसूरी अपने प्राकृतिक सौंदर्य से जहां देश विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करती है, वहीं अब उसी कड़ी को आगे बढाते हुए इस बार हरेला पर्व पर मसूरी की पहाड़ियों पर जंगली फूलों के पौधे रोपने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए मसूरी के विभिन्न स्कूलों ने तीन हजार से अधिक गढढे खोदे है, जिनमें हरेला पर्व के दिन जंगली फूलों के पौधे रोपे जायेंगे। मसूरी की सुंदरता को चार चांद लगाने की इस योजना में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी, आईटीबीपी, होटल एसोसिएशन सहित विभिन्न स्कूल इसमें सहयोग करेंगे।
इस वर्ष हरेला पर्व एक अनोखी पहल के साथ मनाया जायेगा। इसका मकसद पर्यटन नगरी मसूरी को फूलों और सजावटी पेड़ों से भरे-पूरे और रंग-बिरंगे क्षेत्र में बदलना है। यह पर्व हर वर्ष वर्षाकाल के आने व चारों ओर हरियाली के लिए उत्तराखंड में पारंपरिक रूप से मनाया जाता है। जिसमें पहाड़ों की हरियाली को बनाये रखने के लिए पेड लगाये जाते हैं। लेकिन इस बार मसूरी में ब्लूम इनिशिएटिव शुरू किया जाएगा। यह स्थानीय प्रशासन, शिक्षण संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर से जुड़े लोगों की मिली-जुली कोशिश है। मसूरी में ही जन्मे और पले बढ़े उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी ने इस पायलट प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से बताया, व कहा कि यह पहल जापान और उत्तर-पूर्व भारत के पहाड़ी राज्यों के मशहूर फूलों वाले इलाकों से प्रेरित है। इसका मकसद मसूरी के ओक और देवदार के सदाबहार जंगलों में मौसम के हिसाब से रंग-बिरंगे फूल खिलाना है। इसकी तैयारी को लेकर गत अप्रैल माह में एसडीएम राहुल आनंद ने अंग्रेजी स्कूलों के प्रधानाचार्यों व प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी व अब इस योजना को धरातल पर उतारने की तैयारिया की जा रही हैं व विभिन्न दस स्कूलों ने अपने परिसर व शहर की पहाडियों में विश्व पर्यावरण दिवस पर 3,000 से अधिक गढढे खोदे हैं, जिसमें फूलों के पौधे लगाने का काम हरेला पर्व के दिन शुरू होगा। पौधे लगाने के अलावा, इसमें शामिल संस्थान आने वाले सालों में पौधों की देखभाल और संरक्षण का भी विशेष ध्यार रखेंगे ताकि वे अच्छी तरह बढ़ सकें। मसूरी वन विभाग ने मसूरी की ऊंचाई और मौसम के हिसाब से सबसे सही पेड़ों की प्रजातियों का सुझाव देकर इस प्रोजेक्ट में सक्रिय रूप से मदद की है। जिसमें सुझाई गई प्रजातियों में कचनार, तेजपात, जंगली पदम, जैकरंडा, गुलमोहर, भीमल, टेकोमा, अमलतास और बॉटल ब्रश आदि शामिल हैं। अप्रैल के तीसरे हफ्ते से स्थानीय प्रशासन के तहत कई बैठकें हुईं। अप्रैल में आयोजित बैठक में एसडीएम राहुल आनंद ने कहा था कि मसूरी ब्लूम इनिशिएटिव का मकसद न सिर्फ शहर की प्राकृतिक सुंदरता को बढ़ाना है, बल्कि सामुदायिक भागीदारी के तहत लंबे समय तक पर्यावरण की देखभाल को बढ़ावा देना भी है। इससे हरेला परंपरा और टिकाऊ पर्यावरण संरक्षण, दोनों का पर्व बन जाएगा। उत्तराखंड होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप साहनी ने कहाकि इसका  मकसद यह पक्का करना है कि इस पायलट प्रोजेक्ट को बाद में पूरे पहाड़ी राज्य में लागू किया जाए, ताकि वसंत या पतझड़ के मौसम में हमारी हरी-भरी पहाड़ियाँ रंगों के फूलों से खिल उठें।

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