विवाह संस्कार पर केले के पौधे की पूजा करना पर्यावरण संरक्षण का संदेशः वृक्षमित्र डा. सोनी

देहरादून,सोलह संस्कारों में विवाह संस्कार जिसे गृस्थ आश्रम में बालक बालिका को रिस्तो की डोर में बांधते हुए दूल्हा दुल्हन बनाकर विवाह संस्कार के तहत शादी की जाती है। कठुकीचैल सकलाना से रायपुर माया फार्म हाउस में ऊषा देवी व जयसिंह अजवाण के पुत्र देवेंद्र तथा कौशल्या देवी व किशन सिंह की पुत्री मनीषा के विवाह में पहुंचे वृक्षमित्र डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी व उनकी पत्नी किरन सोनी ने दूल्हा दुल्हन को शगुन में तुलसी माता का पौधा उपहार में भेंट कर आशीर्वाद दिया और पौधे की हरियाली जैसी खुशहाली दूल्हा दुल्हन के जीवन में आए ऐसी दुवाए दी।
पर्यावरणविद् वृक्षमित्र डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी ने शास्त्रों में निहित 16 संस्कारों में विवाह संस्कार पर कहा पेड़ पौधे की पूजा अर्चना करना हमारे संस्कारों में निहित हैं। दंपती जीवन की शुरुआत करने से पहले केले के पौधे को विष्णो भगवान को शाक्षी मानकर खुशहाल जीवन निभाने का संकल्प लिया जाता है ताकि हमारे धरा के पेड़ पौधों का संरक्षण हो सके। लेकिन मनुष्य के भोगवादी प्रवृति ने उनका दोहन करना सुरु किया जिसके कारण जलवायु में परिवर्तन आ रहा है। वही किरन सोनी ने पेड़ पौधों के सच्चे संरक्षक हमारे पूर्वज बताते हुए कहा जिन्होंने पेड़ पौधों की रक्षा के लिए उन्हें पूजन से जोड़ा और शादी जैसे पवित्र बंधन पर एक परंपरा बना डाली ताकि हमारे आनेवाली पीढ़ी के भविष्य पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित हो सके। दूल्हा देवेंद्र व दुल्हन मनीषा ने शगुन में पौधा उपहार लेते हुए खुशी का इजहार करते हुए कहा हम भी पेड़ो को बचाने व पौधारोपण का संकल्प लेते है। कार्यक्रम में गंभीर सिंह कठैत, प्रधान बीरपाल कठैत, केदार सिंह अजवाण, चमन सिंह, औतार सिंह, सुंदर सिंह, रमेश सिंह आदि थे।

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