अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बड़ा दांव चला है। जातिगत सर्वे के आंकड़े सामने आने के बाद बिहार में आरक्षण का दायरा बढ़ाकर 60 से 75 फीसदी कर दिया गया। बिहार विधानसभा में यह बिल गुरुवार को पास भी हो गया। कुछ समय पहले ही नीतीश कैबिनेट ने इसे मंजूरी दी थी। लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश का यह दांव बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है। बिहार की महागठबंधन सरकार के आरक्षण बढ़ाने वाले फैसले का वहां विपक्ष में मौजूद बीजेपी ने भी विरोध नहीं किया है।
‘बीजेपी को चुनावी नुकसान हो सकता है’
राजनैतिक जानकारों के अनुसार, विपक्षी इंडिया गठबंधन के लिए यह जातिगत सर्वे हिंदू-मुस्लिम की राजनीति का काउंटर होगा। एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज के पूर्व निदेशक डीएम दिवाकर ने कहा कि जाति सर्वेक्षण और आरक्षण में बढ़ोतरी का सबसे बड़ा असर हिंदू-मुस्लिम की पॉलिटिक्स पर होगा और इससे बीजेपी को चुनावी नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि अन्य राज्यों में जाति जनगणना की मांग इसकी राष्ट्रीय गूंज को बढ़ाएगी।