प्रपत्र-7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज की – Waqt Ki Nazar

प्रपत्र-7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज की

देहरादून, उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान प्रपत्र-7 के माध्यम से मतदाताओं के नाम हटाए जाने तथा ऐसे हटाए गए नामों को पुनः सम्मिलित करने के लिए प्रपत्र-6 प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर निर्वाचन आयोग को पत्र लिख कर कांग्रेस पार्टी की ओर से आपत्ति दर्ज की है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड को लिखे पत्र में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा है कि जनवरी, 2026 से 29 मई, 2026 की अवधि के दौरान उत्तराखंड में एक पूर्व-एस.आई.आर. प्रक्रिया संचालित की गई, जिसमें डी ड्यूप्लकैशन सॉफ्टवेयर के आधार पर एक जैसी प्रविष्टियों तथा जनसांख्यिकीय विवरण और फोटो  के आधार पर समान प्रविष्टियों की पहचान करने और मतदाताओं को अनुपस्थित, मृत, स्थानांतरित, लापता अथवा अन्यथा नाम विलोपन के लिए योग्य मानने हेतु दोहराव-पहचान सॉफ्टवेयर तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रियाओं का उपयोग किया गया। इस प्रक्रिया में मई 2026 से पहले 453459 मतदाताओं के नाम काटे गए। इन सभी में फॉर्म 7 स्वतः सर्जित हुए और आपत्तिकर्ता के रूप में स्वयं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारीध्निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी का पदनाम अंकित किया गया है।
इसके पश्चात दावे एवं आपत्तियों के चरण से पहले 14 जुलाई 2026 को प्रारूप निर्वाचक नामावली प्रकाशित की गई । जिसमें लगभग 71 लाख 33 हजार  मतदाताओं के नाम थे , जिनमें से 24,30,387 व्यक्तियों को विसंगतिध्तार्किक असंगति की श्रेणी में दर्शाया गया।  जिसमें ऐसे व्यक्ति भी सम्मिलित थे जिनके अभिलेखों का 2003 की मतदाता सूची से मिलान नहीं हो पाया था । इसके बाद ऐसे व्यक्तियों को अपनी पात्रता सिद्ध करने तथा आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किए गए । मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा प्रकट की गई जानकारी के अनुसार, जिन मतदाताओं  के अभिलेखों जमा न होने के कारण 97,186 मतदाताओं  के भी  प्रपत्र 7 स्वतः सर्जित हो गए थे ।  इन मामलों में आपत्ति  स्वयं सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारीध् निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी द्वारा किए जाने का उल्लेख किया गया, जिसका मुख्य आधार यह था कि संबंधित व्यक्तियों द्वारा अपेक्षित दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए और इस कारण वे अपात्र हो गए। ऐसी आपत्तियों के आधार पर संक्षिप्त कार्यवाही की गई और तत्पश्चात ऐसे मतदाताओं के नाम निर्वाचक नामावली से हटा दिए गए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि इस संबंध में आपत्ति केवल किसी व्यक्ति के नाम को सही अथवा गलत तरीके से हटाए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वयं उस प्रक्रिया की वैधानिकता पर है जिसके माध्यम से ये नाम हटाए गए। निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 13(2) में यह प्रावधान है कि विद्यमान निर्वाचक नामावली में किसी नाम के सम्मिलित किए जाने के विरुद्ध आपत्ति अथवा किसी नाम को हटाए जाने का आवेदन प्रपत्र-7 में किया जाएगा तथा ऐसी आपत्ति उस व्यक्ति द्वारा की जाएगी जिसका नाम उक्त निर्वाचक नामावली में सम्मिलित है। इस प्रकार नियम द्वारा निर्धारित व्यवस्था में संबंधित निर्वाचक नामावली में नाम रखने वाले व्यक्ति को आपत्ति करने का अधिकार दिया गया है और केवल इस आधार पर कि संबंधित मतदाता ने दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी अथवा अन्य निर्वाचन अधिकारी स्वयं आपत्तिकर्ता बनकर प्रपत्र-7 तैयार या प्रस्तुत नहीं कर सकते। निर्वाचन अधिकारी का प्रत्येक कार्य अधिनियम एवं नियमों के अनुरूप होना आवश्यक है और कोई भी पुस्तिका, मार्गदर्शिका, सॉफ्टवेयर द्वारा उत्पन्न प्रक्रिया अथवा प्रशासनिक निर्देश उन्हीं के अनुरूप ही लागू किया जा सकता है। जहां नियम यह निर्धारित करते हैं कि आपत्ति कौन कर सकता है, वहां किसी प्रशासनिक व्यवस्था द्वारा उस श्रेणी का विस्तार करके किसी नए प्रकार का  आपत्तिकर्ता नहीं बनाया जा सकता है । अतः यदि उपर्युक्त 97,186 मामलों में प्रपत्र-7 की आपत्तियां स्वयं निर्वाचन अधिकारियों द्वारा उत्पन्न अथवा प्रस्तुत की गई थीं, तो ऐसी आपत्तियों के आधार पर किए गए नाम विलोपन की संपूर्ण प्रक्रिया की तत्काल पुनः समीक्षा किया जाना आवश्यक है।

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