देहरादून, एचडीएफसी बैंक ने कई डिजिटल रुपए (सीबीडीसी) यूज केस दिखाए जो बताते हैं कि रोजाना के कंज्यूमर एक्सपीरियंस और कॉर्पोरेट एप्लीकेशन दोनों में भारत की सॉवरेन डिजिटल करेंसी कितनी जरूरी है। पिछले हफ्ते एक इंडस्ट्री फोरम में पेश की गई ये पहलें प्रैक्टिकल यूटिलिटी, रेगुलेटरी कम्प्लायंस और ज्यादा एक्सेसिबिलिटी पर जोर देती हैं , जिससे डिजिटल रुपए की भारत की डिजिटल इकोनॉमी के एक आसान, रोजाना के हिस्से के तौर पर जगह और मजबूत होती है।
क्रेडिट-कार्ड रिवॉर्ड जल्द ही किसी भी ब्रांड-स्पेसिफिक रिवॉर्ड वाउचर की तरह डिजिटल रुपए के बदले रिडीम किए जा सकेंगे। ग्राहक डाइनिंग, फ्यूल, कपड़े या इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कैटेगरी में आखिरी पैसे तक पूरे इस्तेमाल के साथ रिडीम कर सकते हैं, जिससे वे अपने रिवॉर्ड बेनिफिट्स का मजा लेने के तरीके में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी और ट्रांसपेरेंसी ला सकते हैं।
प्रमोशनल कैंपेन में डिजिटल रुपया गिफ्ट वाउचर होंगे, जिन्हें बैंक क्वालिफाइंग कस्टमर इवेंट पर ऑटोमैटिकली ट्रिगर कर सकता है। ट्रिगर होने के बाद, वाउचर सीधे कस्टमर के एचडीएफसी बैंक डिजिटल रुपया वॉलेट में लोड हो जाएगा, जिसे मर्चेंट कैटेगरी में किसी भी यूपीआई क्यूआर कोड को स्कैन करके खर्च किया जा सकता है , इससे कस्टमर की पसंद और कैंपेन की प्रभावशीलता बढ़ेगी। संगठन जल्द ही एचडीएफसी बैंक के साथ अपने कॉर्पोरेट नेट-बैंकिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल रुपये में सीधे भोजन, ईंधन और यात्रा भत्ते की स्वयं सेवा और वितरण करने में सक्षम होंगे। प्रोग्रामेबल भुगतान यह सुनिश्चित करते हैं कि धन का उपयोग केवल उनके इच्छित उद्देश्य के लिए किया जाएगा, अनुपालन में सुधार करते हुए वित्त टीमों के लिए सुलह के प्रयास को काफी कम कर देगा।