मार्केट और लीडरशिप पर साझा किए महत्वपूर्ण विचार

देहरादून, तुलाज़ इंस्टीट्यूट में ‘वॉयसेस ऑफ भारत लीडरशिप सीरीज’ के अंतर्गत एक प्रेरणादायक एवं विचारोत्तेजक सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें सुंदररमन राममूर्ति, सीईओ एवं एमडी, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम तुलाज़ इंस्टीट्यूट द्वारा छात्र संसद इंडिया के सहयोग से आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और देश के एक प्रमुख वित्तीय नेता से सीधे संवाद का अवसर प्राप्त किया। यह सत्र एक गतिशील फायरसाइड चौट के रूप में आयोजित किया गया, जिसमें भारतीय शेयर बाज़ार की कार्यप्रणाली, बड़े स्तर पर नेतृत्व और बदलते आर्थिक परिदृश्य पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक स्वागत, दीप प्रज्वलन और सांस्कृतिक प्रस्तुति के साथ हुई, जिसके बाद संस्थान की उपलब्धियों और दृष्टिकोण पर आधारित एक प्रस्तुति दी गई।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण इंटरैक्टिव संवाद और प्रश्नोत्तर सत्र रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने निवेश, करियर विकास और भारत के आर्थिक भविष्य जैसे विषयों पर अपने प्रश्न रखे। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राममूर्ति ने कहा, “पैसे के पीछे मत भागिएकृमूल्य निर्माण पर ध्यान दीजिए, पैसा स्वयं आएगा। जो भी करना चाहें, पूरे विश्वास और बिना किसी सीमा के करें। बचत के बजाय निवेश पर ध्यान दें और दीर्घकालिक सोच रखें। वर्तमान नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति कर रहा है और विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा हैकृभविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल है।” मुख्य सत्र से पूर्व, सुंदररमन राममूर्ति ने तुलाज़ इंस्टीट्यूट के ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के संकाय सदस्यों के साथ एक राउंड टेबल बैठक भी की, जिसमें उन्होंने वित्तीय निर्णय लेने की प्रक्रिया पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने निवेश और सट्टेबाज़ी के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए सुविचारित और अनुशासित निवेश दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। इस अवसर पर रौनक जैन, वाइस चेयरमैन, तुलाज़ ग्रुप ने कहा, “तुलाज़ इंस्टीट्यूट में सुंदररमन राममूर्ति जैसे विशिष्ट व्यक्तित्व का स्वागत करना हमारे लिए सम्मान की बात है। ऐसे संवाद विद्यार्थियों की सोच को नई दिशा देते हैं और उन्हें वास्तविक दुनिया के अनुभवों से जोड़ते हैं। हम निरंतर ऐसे मंच प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो शिक्षा और उद्योग के बीच सेतु का कार्य करें।”

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